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अपने बच्चों को देते हैं अच्छी तालीम, दूसरों के बच्चों को कहते हैं पत्थर फेंको

कश्मीर घाटी में हुर्रियत नेताअों व अलगाववादियों का दोहरा चरित्र लोगों के सामने है। ये नेता एक तरफ कश्मीर के भोले-भाले युवाअों को सेना के खिलाफ भड़काते हैं और देश विरोधी नारे लगवाते हैं। स्कूल कॉलेजों में अाग लगाने को उकसाते हैं तथा सेना के खिलाफ पत्थरबाजी के लिए प्रेरित करते हैं। वहीं अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा के लिए अच्छे स्कूलों में भेजते हैं, विदेशों में पढ़ाते हैं। इनके बच्चे देश के नामी कंपनियों के अलावा विदेशों में नौकरी भी कर रहे हैं और एेशो अाराम की जिंदगी जी रहे हैं।

हुर्रियत नेता व अलगाववादियों का आरोप है कि सेना द्वारा संचालित स्कूल अगली पीढ़ी को अपने धर्म-संस्कृति से दूर कर रहे हैं। जबकि वो खुद अपने व अपने संबंधियों के बच्चों को अच्छी शिक्षा हासिल करवा रहे हैं।

इन नेताओं के बच्चे व रिश्तेदार किस तरह से ऐशो-आराम की जिंदगी जी रहे हैं, इसका एक उदाहरण सैयद अली शाह गिलानी का परिवार व गुट है, जो कश्मीर के युवाओं को ‘बड़े मकसद’ से हमेशा अपनी पढ़ाई छोड़कर सड़कों पर उतरने को कहते रहे हैं। अप्रत्यक्ष रूप से ‘पत्थरबाजी’ के लिए उनसे अनुरोध करते रहे हैं।

गिलानी के बेटे नईम गिलानी पाकिस्तान के रावलपिंडी में चिकित्सक हैं। वहीं उनके दूसरे बेटे जहूर भारत में एक प्राइवेट एयरलाइंस के मेंबर हैं। गिलानी की बेटी जेद्दा में एक शिक्षक है और पति वहां एक इंजीनियर है। गिलानी गुट के महासचिव मोहम्मद अशरफ सेहराई ने भी अपने बच्चे को अच्छी शिक्षा दिलाई। उनका बेटा आबिद सेहराई दुबई में एक कंप्यूटर इंजीनियर है। ऐसे और भी कई नाम हैं, जिनके बच्चे पढ़-लिख कर बाहर कहीं अच्छी व सुकून जिंदगी जी रहे हैं।

जबकि सेना द्वारा संचालित स्कूलों पर निशाना साधते हुए गिलानी ने कहा था, ‘हम लोग अपनी अगली पीढ़ी को खो रहे हैं। हमें इन संस्थानों में अपने युवा को नहीं भेजना चाहिए। हमें यह देखना होगा कि ये संस्थान हमारे बच्चों को किस तरह की शिक्षा दे रहे हैं।’

राष्ट्रीय मुख्य धारा से कश्मीरी छात्रों को अलग करने के प्रयासों के तहत हुर्रियत कट्टरपंथियों ने दावा किया कि सेना द्वारा संचालित स्‍कूल ‘आपत्तिजनक गतिविधियों’ में संलिप्त हैं। हालांकि भाजपा ने इसका खंडन करते हुए कहा कि हुर्रियत नेता सेना द्वारा संचालित स्‍कूलों से डरे हुए हैं, क्योंकि वे कश्मीरी बच्चों के बीच ‘राष्ट्रवाद की भावना’ को बढ़ा रहे हैं। घाटी में छात्रों और सुरक्षा बलों के बीच सैकड़ों संघर्षों के बाद ये बयान सामने आए थे।

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